देहरादून का मोहब्बेवाला क्षेत्र हादसों का प्वाइंट बनता जा रहा है. हादसों को रोकने के लिए तमाम प्रयास किए जा रहे हैं.ग्राउंड रिपोर्ट- रोहित सोनी
देहरादून: मोहब्बेवाला में लगातार हो रहे सड़क हादसे अब परिवहन विभाग की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर रहा है. क्योंकि, इस साल करीब 15 घटनाएं इस क्षेत्र में हो चुकी हैं. जबकि, यह क्षेत्र ब्लैक स्पॉट श्रेणी में शामिल नहीं है. बावजूद इसके लगातार घटनाएं हो रही हैं. इसके पीछे तमाम वजह माने जा रहे हैं.
हालांकि, परिवहन विभाग इस बात पर जोर दे रहा है कि इस क्षेत्र के आसपास स्पीड ब्रेकर लगाए जाने से दुर्घटनाओं पर लगाम लग सकेगी. बहरहाल, परिवहन विभाग की ओर से इस क्षेत्र का अध्ययन भी कराया गया है, लेकिन इंडस्ट्रियल एरिया होने की वजह से सड़क दुर्घटनाएं लगातार बढ़ रही है, जिससे स्थानीय निवासी भी काफी ज्यादा परेशान हैं. ऐसे में क्या है मौजूदा स्थिति? ईटीवी भारत आपको ग्राउंड रिपोर्ट के जरिए रूबरू करवाएगा.
बता दें कि उत्तराखंड की राजधानी देहरादून के मोहब्बेवाला क्षेत्र में लगातार हो रहे सड़क दुर्घटनाएं परिवहन विभाग, राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण और सड़क सुरक्षा व्यवस्था की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर रही हैं. क्योंकि, इस साल अभी तक इन नौ महीने में करीब 15 सड़क दुर्घटनाएं हो चुकी हैं.
इनमें से ज्यादातर हादसे भारी वाहनों के अनियंत्रित होकर पलटने या सड़क किनारे मौजूद इंफ्रास्ट्रक्चर से टकराने की वजह से हुई है. इन सभी हादसों में दो लोगों की मौत और कई लोग घायल हुए हैं. मोहब्बेवाला लगातार हो रही सड़क दुर्घटनाओं के बावजूद इसके ब्लैक स्पॉट श्रेणी में शामिल नहीं किया गया है, लेकिन लगातार हो रही दुर्घटनाओं ने इसे दुर्घटना संभावित क्षेत्र बना दिया है.
मोहब्बेवाला में इस साल हुए कुछ प्रमुख हादसे-
लगातार हादसों के बाद प्रशासन ने मोहब्बेवाला क्षेत्र में स्पीड ब्रेकर और रंबल स्ट्रिप लगाने की दिशा में कदम उठाए हैं. अधिकारियों का मानना है कि इससे भारी वाहनों की गति नियंत्रित की जा सकती है. बड़े चेतावनी बोर्ड, स्पीड मॉनिटरिंग उपकरण और अन्य सड़क सुरक्षा उपायों पर भी विचार किया जा रहा है. हालांकि, राष्ट्रीय राजमार्गों पर सामान्य रूप से स्पीड ब्रेकर लगाने को लेकर तकनीकी और नियम की सीमाएं हैं.
यही वजह है कि प्रशासन सड़क इंजीनियरिंग विशेषज्ञों और राष्ट्रीय राजमार्ग अधिकारियों के साथ मिलकर वैकल्पिक उपायों पर भी विचार कर रहा है. लगातार बढ़ रहे सड़क दुर्घटनाओं को देखते हुए जिलाधिकारी और वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने मौके का निरीक्षण कर ढलान, मोड़, दृश्यता एवं सड़क की संरचना की तकनीकी जांच कराने के निर्देश भी दिए हैं.
मोहब्बेवाला क्षेत्र में लगातार हो रहे हादसों के पीछे कई वजह-
इसी साल 20 सितंबर के हादसे के बाद प्रशासन ने पुलिस और परिवहन विभाग को 24 घंटे पेट्रोलिंग और सघन चेकिंग के निर्देश दिए हैं. ओवरस्पीड और ओवरलोडिंग की निगरानी के लिए टास्क फोर्स तैनात करने और मोहब्बेवाला से पहले चेक पोस्ट बनाने की बात कही गई है. सड़क की डिजाइन, ढलान, मोड़, दृश्यता और यातायात दबाव का तकनीकी परीक्षण भी कराया जाना तय किया गया है.
लेकिन, इंडस्ट्रियल एरिया होने के चलते इस क्षेत्र में भारी वाहनों का काफी ज्यादा दबाव रहता है. ऐसे में जरूरी है कि ट्रकों के लिए सुरक्षित एस्केप लेन या क्रैश बैरियर की व्यवस्था की जाए. इसके साथ ही दुर्घटना के बाद केवल चालक पर कार्रवाई के बजाय सड़क डिजाइन और विभागीय जिम्मेदारी भी तय करने की जरूरत है. मोहब्बेवाला क्षेत्र के लिए नई गति सीमा तय करने पर परिवहन विभाग जोर दे रहा है.
दरअसल, डाटकाली से मोहब्बेवाला तक करीब साढ़े सात किलोमीटर का मार्ग दुर्घटना के लिहाज से काफी संवेदनशील है. सड़क परिवहन एव राजमार्ग मंत्रालय, भारत सरकार की अधिसूचना के 2018 के अनुसार, इस मार्ग पर हल्के मोटर वाहनों के लिए अधिकतम गति सीमा 70 किलोमीटर प्रति घंटा, मध्यम एवं भारी मोटर वाहनों और मालवाहक वाहनों के लिए 60 किलोमीटर प्रति घंटा, तिपहिया वाहनों के लिए 50 किलोमीटर प्रति घंटा और दोपहिया वाहनों के लिए 60 किलोमीटर प्रति घंटा अधिकतम गति सीमा निर्धारित है.
लेकिन, दुर्घटनाओं और इस सड़क मार्ग की परिस्थितियों को देखते हुए आशारोड़ी से मोहब्बेवाला मार्ग तक के लिए भारी वाहनों की गति सीमा 30 किलोमीटर प्रति घंटा, हल्के वाहनों की 40 किलोमीटर प्रति घंटा, दोपहिया वाहनों की 40 किलोमीटर प्रति घंटा और तिपहिया वाहनों की 25 किलोमीटर प्रति घंटा की गति सीमा निर्धारित किए जाने ला निर्णय लिया गया है.
इसके साथ ही ढलान ज्यादा होने के चलते अधिक से अधिक ब्रेकर और रंबल स्ट्रिप लगाने पर जोर दिया जा रहा है. ताकि, आशारोड़ी की तरफ से तेज रफ्तार में आने वाले वाहनों की गति सीमा पर लगाम लगाया जा सके. ताकि, सड़क दुर्घटनाओं की कमी आए. वहीं, ज्यादा जानकारी देते हुए संयुक्त परिवहन आयुक्त राजीव कुमार मेहरा ने कहा कि,
वहीं, ईटीवी भारत से बातचीत करते हुए स्थानीय दुकानदार शरद कुमार ने अपनी बात रखी. उन्होंने कहा कि,
“आशारोड़ी की तरफ से आने वाले वाहनों की गति काफी ज्यादा तेज होती है. ऐसे में वाहनों के ब्रेक फेल होने की संभावना बढ़ जाती है. क्योंकि, नीचे पूरी ढलान है. जिसके चलते वाहन पलट जाते हैं. हर महीने दो-तीन सड़क दुर्घटनाएं इस क्षेत्र में होती है. कार और बाइक के साथ ही बड़े वाहनों की रफ्तार भी तेज होती है.“- शरद कुमार, स्थानीय दुकानदार
इसके अलावा स्थानीय निवासी शराफत ने भी हादसे की पीछे की वजह है. उनका कहना है कि,
“लोडेड बड़े वाहनों की दुर्घटनाएं ज्यादा होती हैं. जो ट्रक ओवरलोड होते हैं, वो उल्टे सीधे तरीके से गाड़ी चलाते हैं. जिसके चलते चालक वाहन को कंट्रोल नहीं कर पाता है और वाहन पलट जाती है. इस क्षेत्र में सबसे ज्यादा बड़े वाहन ही पलट रहे हैं. यह वाहन ढलान होने की वजह से फुल स्पीड में शहर की तरफ आगे बढ़ते हैं.“-शराफत, स्थानीय निवासी
वहीं, स्थानीय निवासी बलराज सिंह ने कहा कि,
“पिछले 5-6 महीने से सड़क दुर्घटनाएं इस क्षेत्र में काफी ज्यादा हो रही है. खास बात ये है कि जब से दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर पर वाहनों का संचालन शुरू हुआ, उसके बाद सड़क दुर्घटनाओं में काफी ज्यादा बढ़ोत्तरी हुई है. अत्यधिक घटनाएं बड़ी गाड़ियों की वजह से ही हो रही है. जब ये मार्ग सिंगल लेन हुआ करती थी, उस दौरान भी इतनी सड़क दुर्घटनाएं इस क्षेत्र में नहीं होती थी, लेकिन अब काफी ज्यादा हो रही है.“- बलराज सिंह, स्थानीय निवासी
इसके अलावा स्थानीय निवासी रविंद्र सिंह ने कहा कि,
“इस क्षेत्र में सड़क दुर्घटनाएं ज्यादा होने की मुख्य वजह ढलान है. अगर चेक पोस्ट पर वाहनों को रोकर बड़ी गाड़ियों को पहले निकल जाए, तो शायद सड़क दुर्घटना में लगाम लग सकती है. हर तीसरे चौथे दिन इस क्षेत्र में सड़क दुर्घटनाएं हो रही है, लेकिन सबसे बड़ी बात ये है कि सड़क दुर्घटनाओं में हमेशा से ही यह देखा गया है कि ट्रक पलट जाता है.“- रविंद्र सिंह, स्थानीय निवासी
वहीं, नवनीत यादव ने कहा कि सड़क दुर्घटनाओं के पीछे की मुख्य वजह अनियंत्रित तरीके से वाहनों का संचालन है. इस क्षेत्र में वाहनों की गति पर सरकार का कोई नियंत्रण नहीं है. इसके साथ ही यातायात के जो नियम होनी चाहिए थे, उन नियमों का पालन नहीं हो रहा है.
“इस क्षेत्र में स्पीड ब्रेकर बनाए गए हैं, लेकिन वो भी पर्याप्त संख्या में नहीं लगाए गए हैं. इसके अलावा साइन मार्क भी नहीं लगे हुए हैं. जिससे चलते लोगों को नहीं पता चल पा रहा है कि ये दुर्घटना संभावित क्षेत्र है. इतना ही नहीं लोगों को यातायात के नियमों की जानकारी नहीं है. कुल मिलाकर शासन प्रशासन की भारी कमी है. जिसके चलते सड़क घटनाएं बढ़ रही हैं.“- नवनीत यादव
वहीं, आर्मी रिटायर्ड शैयाद मेहताब जैदी ने भी अपनी बात रखी. उन्होंने कहा कि,
“पिछले 2 साल से सड़क दुर्घटनाएं काफी ज्यादा हो रही है. इस क्षेत्र में जितने भी बड़े भारी वाहन आते हैं, वो अपने वाहनों पर नियंत्रण नहीं कर पा रहे हैं. ऐसे में माल वाहक बड़े वाहनों की गति सीमा को तय करने की जरूरत है. ताकि, चेक पोस्ट से सुभाषनगर तक उनकी गति सीमा काफी ज्यादा कम हो, जिससे सड़क दुर्घटनाओं में कमी आएगी.“- शैयाद मेहताब जैदी, आर्मी रिटायर्ड
आर्मी रिटायर्ड शैयाद मेहताब जैदी का कहना है कि सड़क दुर्घटनाओं में ज्यादातर मजदूर चपेट में आ रहे हैं. इस क्षेत्र में सड़कों की चौड़ाई भी कम है, जिसे बढ़ाए जाने की जरूरत है. इसके अलावा एक बड़ी समस्या ये है कि यहां पैदल चलने वाले यात्रियों के लिए फुटपाथ तो बने हैं, लेकिन फुटपाथ पर लोग अपने वाहन चला रहे हैं. इस पर ध्यान देने की जरूरत है.
