अत्यधिक व्यस्तता से जब भी क्लान्त होता हूॅं तब साहित्य का अध्ययन मुझे स्फूर्ति देता है। इधर सोशियल मीडिया में जंतर-मंतर में चले आंदोलन के सचित्र समाचारों का अवलोकन किया। गहरा दु:ख हुआ विदित हुआ कि श्रद्धेय प्रधानमंत्री जी पर अनेक असंसदीय तथा अमर्यादित टिप्पणियां की गई। उनकी पूज्यनीया माताजी के लिए भी अपशब्दों का प्रयोग किया गया,यह काॅकरोच पार्टी के मार्गदर्शन में हुआ ….. ‘यतो नाम ततो गुण’ की कहावत सत्य सिद्ध हुई।काॅकरोच गन्दगी का भी पर्याय है ….. विद्यार्थियों के स्वस्थ-विरोध के प्रभावी संदेश का यह उचित मंच सा प्रतीत नहीं हुआ। माननीय सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश की प्रतिक्रिया के मूल आशय/भाव को समझे बिना व्यंग्यात्मक प्रतिक्रिया में काॅकरोच पार्टी का उदय और अविवेकपूर्ण उन्मादी आंदोलन भारत के वैविध्यपूर्ण तथा सर्व समावेशी लोकतंत्र के लिए उचित नहीं है।भारत नेपाल या बांग्लादेश नहीं है और न बन सकता है। भारत में सत्ता परिवर्तन बुलेट (बन्दूक की गोलियों) से नहीं अपितु बैलेट(मताधिकार के प्रयोग) से आएगा।भारत धर्मान्ध पाकिस्तान भी नहीं है ….. मोदी जी के भारत में सभी सरकारी योजनाओं का लाभ सभी भारतीयों को समान रूप से मिलता है ….. यह संस्कार मोदी जी सहित संपूर्ण हिन्दू समाज की कोशिकाओं में रचे बसे हैं …. क्या पाकिस्तान और बांग्लादेश में ऐसे समान व्यवहार की कल्पना कभी साकार हो पाएगी? भारतीय संस्कारों की सरलता का लाभ शताब्दियों से आसुरी और दानवी शक्तियां उठाती रही हैं और आज भी उठा रही हैं। राष्ट्र की मुख्य धारा में जो समाज है वह परिवार नियोजन के द्वारा भारत के संसाधनों पर दबाव घटाने के सहज सार्थक प्रयास कर रहा है और आज उसके भविष्य पर ही संकट के बादल छा रहे हैं ….. जहां अवैध घुसपैठ और अनियंत्रित जनसंख्या-वृद्धि से अनेक ज़िलों का जनसंख्या संतुलन बिगड़ता जा रहा है।इस ओर इस नई पीढ़ी का ध्यान ही नहीं जा रहा है ….. । व्यभिचार और दुष्कर्म की घटनाएं भारत की आत्मा को निगल रही है इसका समाधान कैसे निकलेगा ….इस तरफ नई पीढ़ी का ध्यान नहीं है अपितु वह स्वयं इसकी चपेट में आ चुकी है …… लिवइन के विरुद्ध क्या देश का युवा आंदोलन करेगा? यद्यपि पेपर लीक के आंदोलन का मैं विरोधी नहीं हूॅं किन्तु मर्यादित आंदोलन का पक्षधर अवश्य हूॅं। आदरणीय प्रधानमंत्री जी और उनकी आदरणीया माता जी के लिए अपशब्दों का प्रयोग दण्डनीय अपराध है ….. ऐसे अराजक तत्वों को चिन्हित कर उन्हें दण्ड अवश्य देना चाहिए …. राष्ट्रीय-सम्पत्ति को क्षति पहुॅंचाने वाले विद्यार्थी नहीं हो सकते ….. विद्यार्थियों की आड़ लेकर ऐसे असामाजिक तत्वों पर कठोर कार्यवाही की जानी चाहिए।जातीय और धार्मिक उन्माद के नारे लगाकर देश को गृहयुद्ध में झोंकने की तैयारी करने वाले राष्ट्र-विरोधी तत्त्वों को भी चिन्हित कर कारागार भेजा जाना आवश्यक है …….. एक शिक्षक के नाते मुझे विद्यार्थियों की आड़ लेकर देश में अराजकता फैलाने वाले तत्त्वों से देश के विद्यार्थियों को सचेत करने का पूर्ण अधिकार है और मैं वही कर रहा हूॅं ……
