किसी के सुख में प्रसन्नता सहित सम्मिलित होना और दुःख में दुखी होना सभी के हृदय की उदारता नहीं होती। मनोवैज्ञानिक कारणों से केवल एक से तीन प्रतिशत व्यक्तियों की…