किसी के सुख में प्रसन्नता सहित सम्मिलित होना और दुःख में दुखी होना सभी के हृदय की उदारता नहीं होती। मनोवैज्ञानिक कारणों से केवल एक से तीन प्रतिशत व्यक्तियों की चित्तवृत्ति ही पाश्विकता के स्तर से ऊपर उठी होती है।नई दिल्ली में स्थित दिल्ली विश्वविद्यालय के दक्षिणी परिसर के सेवित-क्षेत्र में एक निजी छात्रावास का भरभराकर गिर जाने के पश्चात समाज में जिस वेदना की लहरें दिखनी चाहिए थी,उसका अभाव आज 07 सितंबर 2026 को घटना के एक दिन के अन्तराल पर अनुभव हुआ।अनेक तरुणों की अकाल मृत्यु हुई है और अनेक गम्भीर रूप से घायल हैं…… मन उदास भी है और इस उदासीन व्यवहार से विचलित भी …… भगवान सभी को सद्बुद्धि दें ….. आपका—–
