महानगरों में जनसंख्या दबाव रोकना ही होगा : डॉ. सुशील कोटनाला

भारत की राजधानी में हूॅं। अद्भुत विषमता है,नर्क तथा स्वर्ग का अन्तर इस महानगर में सहज दृष्टिगोचर होता है।एक ओर निर्धनता,विपन्नता से पीड़ित बस्तियां हैं और दूसरी ओर सम्पन्न, समृद्ध…